Cheekhati Aawazein

Rated 4.75 out of 5 based on 4 customer ratings
(4 customer reviews)

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प्रस्तुत काव्य-संग्रह ‘चीख़ती आवाज़ें’ उन दबी हुई संवेदनाओं का अनुभव मात्र है जिसे कवि ने अपने जीवन के दौरान प्रत्येक क्षण महसूस किया। हम अपने चारों ओर निरंतर ही एक ध्वनि विस्तारित होने का अनुभव करते हैं परन्तु जिंदगी की चकाचौंध में इसे अनदेखा करना हमारा स्वभाव बनता जा रहा है। ये ध्वनियाँ केवल ध्वनिमात्र ही नहीं बल्कि समय की दरकार है। मानवमात्र की चेतना जागृत करने का शंखनाद है। यही उद्घोषणा जब धरातल पर आने की इच्छा प्रकट करती है तब ‘लेखनी’ से स्वतः ही संवेदनायें शब्दों के रूप में एक ‘चलचित्र’ की भाँति प्रस्फुटित होने लगती हैं और मानवसमाज से एक अपेक्षा रखती हैं कि इन मृतप्राय हो चुकीं संवेदनाओं को पुनर्जीवित होने का ‘वरदान’ मिले ! प्राकृतिक संसाधनों का ध्रुवीकरण आज एक वृहत्त समस्या बनती जा रही है। हम अपने स्वार्थ के वशीभूत नैतिक मूल्यों की निरंतर अवहेलना करते चले जा रहे हैं। एक तबका और अधिक धनवान होने की दौड़ में भाग रहा है जबकि दूसरा तबका निर्धन से अतिनिर्धनता की दिशा में अग्रसर है। संसाधनों का ध्रुवीकरण इसका मूल कारण है। एक पाले में अपने हक़ के लिए निरंतर संघर्षरत ‘कृषक’ और ‘मज़दूर’ तो दूसरी तरफ अपने अस्तित्व को तलाशती ‘स्त्री’,दोनों की दशा और दिशा आज समाज में विचारणीय है। ‘चीख़ती आवाज़ें’ काव्य-संग्रह में संकलित सभी रचनायें किसी न किसी ‘भाव’ में मानवसमाज में फैले असमानता का प्रखर विरोध करतीं हैं।

  • Author : Dhruv Singh ‘Eklavya’
  • ISBN : 978-93-87856-76-9
  • Language : Hindi
  • Binding : Paperback
  • Pages : 102

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4 reviews for Cheekhati Aawazein

  1. Rated 4 out of 5

    Vandana Kumar

    Good Book

  2. Rated 5 out of 5

    Team iBlogger

    iBlogger Team की ओर से ध्रुव जी को उनके काव्य संग्रह के प्रकाशन के लिए ढेरों शुभकामनाएं।

  3. Rated 5 out of 5

    Ritu

    Good

  4. Rated 5 out of 5

    Neelendra Shukla ” Neel “

    Congratulations Dhruv Ji!

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